धीरे धीरे से भाग --- 21
दीप्ती को एहसास ही नहीं हुआ की वो मोहन की बाहों मे पिघलती जा रहीं है ना ही मोहन को होश था ना ही दीप्ती को
दोनों ही मसूरी की शीतलता मे मदहोश आँखो ही आँखो मे डूब रहे थे, अपने साथियों को ना जाने वो कितने पीछे छोड़ आए थे उन्हें इस का ख्याल भी नहीं था,,,,
मोहन दीप्ती को बाहों मे लिए जहा सुकून महसूस कर रहा था वही दीप्ती को भी ना जाने कौन सी अंजनी सी डोर मोहन की और खींचे जा रहीं थी,,, तेज़ हवा के झोंके से दीप्ती के जुल्फें उसके गालों को चूम रहीं थी उसका दुपट्टा हावो मे लहरा रहा था दीप्ती इस गुलाबी मौसम मे इतनी प्यारी लग रहीं थी की मोहन अपनी सुद्ध गवाएं रहा था,,,,
इस पल का उसने कई महीने इंतज़ार किया था उसे यकीन नहीं था की बिन बोले भी ये लम्हें उसके जीवन मे आएगा वो अपनी मोहब्बत अपने प्यार के इतने करीब होगा
मोहन ने अपने हाथो को दीप्ती के गालों पर आती हुई जुल्फों को हटा कर उसके कानो के पीछे किया और उसके और करीब जा कर उसके कानो मे बोला थैंक्स दीप्ती मेरे साथ इतना खूबसूरत पल बिताने के लिए ये पल मे कभी नहीं भूल सकता इन यादो को मे हमेशा साजो कर रखूंगा अपने पास,,,
मोहन चाहता तो अभी दीप्ती को बता सकता था की वो दीप्ती से कितना प्यार करता है अब उसे ये भी एहसास होने लग गया था की दीप्ती भी उसके बारे मे कुछ ऐसा ही सोचती है उसके दिल मे कही ना कही मोहन के लिए फीलिंग्स है वो भले ही अपने मुँह से कभी नहीं काबुलेगी उसके एहसास दबे हुए से है वो अगर ना भी बताए पर अब मोहन को उसका प्यार मिल ही गया ये लम्हा ही उसके प्यार को मुकम्बल करता है उसे अब जिंदगी से कुछ नहीं चाहिए था,,,
उसे ये खुवाइश कभी नहीं थी की दीप्ती का प्यार उसे मिले ही वो दीप्ती को कभी भी उसकी फैमिली के सामने नहीं झुकेना चाहता था दोनों मे ही इतनी हिम्मत नहीं थी की अपनी अपनी फैमिली को शादी के लिए राजी कर सके आने वाला वक़्त उन्हें कहा ले जाए वो इससे डरता था साथ ना दे पाया तो वो दीप्ती का । दीप्ती उसकी याद मे एक भी आँसू बहे उसे ये मंजूर नहीं था इसलिए मन ही मन उससे प्यार करता रहा कभी भी इज़हार नहीं किया उसने अपनी मोहब्बत का दीप्ती के सामने,,,
और आज तो उसे मौका मिला था उन दोनों के सिवा कोई नहीं था वहाँ और दीप्ती उससे एक बेला की तरह लिपटी हुई थी वो अपनी पूरी ज़िन्दगी दीप्ती की यादो मे गुजर सकता है उसके लिए तङप सकता है पर दीप्ती खुश रहे वो यही चाहता था इसलिए नहीं कह पाया अपने मन की बात उसने दिल मे ही दफन कर लिया था इस मोहब्बत को,,,,,,,
दीप्ती ने ज़ब सुना की मोहन उसे थैंक्स बोल रहा है तब उसे होश आया और वो झट से मोहन से अलग हुई,,,,,
उसे अपनी गलती का एहसास हुआ की वो क्या कर रहीं थी वो तो शुक्र है की कुछ और नहीं हुआ नहीं तो दीप्ती कभी खुद से ही नजरे नहीं मिला पाती उसे लगा मोहन अब उस के बारे मे क्या सोचेगा कैसी लड़की है कुछ लिहाज ही नहीं है,,,
मोहन से वो कभी नज़ारे नहीं मिला पायेगी वो आखिर उसने ऐसा किया ही क्यों,,, क्यों नहीं रोक पाई खुद को मोहन के करीब जाने से, मोहन के लिए ये एहसास उसके मन मे कैसे पैदा हो गयें मन ही मन दीप्ती खुद को ही कोस रहीं थी,,,,
मोहन ने उसके चेहरे पर आते हुए भावों को मानो पढ़ लिया हो वो उसके पास आया और उसके झुके हुए सर को अपने एक उंगली से ऊपर की ओर उठाते हुए बोला, दीप्ती ऐसा कुछ भी नहीं हुआ जो तुम नज़रे झुकारे खड़ी हो अपनी ख़ुशी जाहिर करना कोई गलत बात नहीं है ओर ये सब तो नार्मल है लाइफ मे इसे इतना सीरियस ना लो,,,,
अब चलो हमें बहुत देर हो गई है रात भी हो रहीं है अभी इनलोगो को भी ढूंढना है की कहा है ये सब हम कितनी दूर आ गयें है इन लोगो से ये ये मुझे भी पता नहीं है,,,,,
दीप्ती ने हा मे सर हिलाया और मोहन के पीछे पीछे चल दी
दोनों रास्ता देखते देखते थक गयें थे पर उन्हें बाहर निकलने का रास्ता ही नहीं मिल रहा था ना ही उन्हें कोई ऐसा मिला की उन्हें सही राह बता सके जिससे वो अपने बिछड़े हुए साथियों से मिल सके,,,,
उधर रिया दीप्ती के ना मिलने से परेशान हो रहीं थी रात बीत रहीं है और अब तक दीप्ती और मोहन का कुछ भी पता नहीं है उसने सिद्धांथ से कहा मुझे बहुत डर लग रहा है कही दोनों रास्ता तो नहीं भटक गयें नई जगह है कहा गयें है कुछ नहीं पता और सोने पर सुहाग तो देखो दोनों के फ़ोन भी नहीं लग रहे है एक तो यहाँ नेटवर्क बहुत कम ही आते है ये दोनों कितनी दूर निकल गयें ये भी नहीं पता,,,
सिद्धांथ बोला, रिया तुम फ़िक्र ना करो मोहन है ना उसके साथ वो ले ही आएगा उसे सही सलामत और तुम तो ये सोचो की अगर दोनों के बीच ऐसे मे लवली मोमेंट हो जाए तो कितना अच्छा होगा,,, सिद्धांथ ने रिया को अपनी और खींचते हुए बोला,,,,
रिया बोली चुप करो तुम यहाँ मेरी जान निकल रहीं है और तुम हो की,,, तुम्हे तो हर बात पर लव सव ही दिखता है ये सोचो कही दोनों फंस गयें तो कही दोनों के साथ कुछ हो गया तो यहाँ आगे जंगल है और जंगल मे जंगली जानवर भी होते है उन्हें कुछ हो गया तो ????
क्या रिया का डर ना सही था क्या दोनों के साथ ऐसा कुछ तो नहीं होने वाला थी जिसके लिए उन्हें मसूरी आना उनका जी का जंजाल बन जाए क्या आगे मोड़ लेगी मेरी कहानी जानने के लिए जुड़े रहे मेरे साथ,,,,
फेजिया खान
kashish
24-Sep-2023 12:08 PM
Fabulous
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madhura
24-Sep-2023 09:03 AM
Amazing
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Anjali korde
24-Sep-2023 08:51 AM
Nice
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